March 30, 2026 5:04 pm

खाकी का फर्ज: हर त्यौहार सुरक्षित मने, रमजान हो या होली, अपना तो त्योहार तभी, जब मंजूर हो जाए छुट्टी–खाकी

ब्यूरो रिपोर्ट अनुराग पटेल/रफी अहमद

गोला गोकर्णनाथ खीरी। शहर में रंगों की खुशबू घुलने लगी है। कहीं गुझिया तली जा रही है, तो कहीं इफ्तार की तैयारियां हो रही हैं। बच्चे पिचकारियां सजा रहे हैं और घरों में त्योहार की रौनक है। लेकिन इन्हीं खुशियों के बीच कुछ चेहरे ऐसे भी हैं, जिनके लिए त्योहार का मतलब ड्यूटी, जिम्मेदारी और सतर्कता है—ये चेहरे हैं खाकी वर्दी में तैनात पुलिसकर्मियों के।

पुलिस का नाम सुनते ही सख्त छवि उभरती है, लेकिन इस सख्ती के पीछे एक संवेदनशील दिल भी धड़कता है। कड़कड़ाती ठंड, झुलसाती गर्मी या तेज बारिश—हर मौसम में खाकी डटी रहती है। जब पूरा शहर रंग और इबादत में डूबा होता है, तब पुलिसकर्मी चौराहों पर खड़े होकर यह सुनिश्चित करते हैं कि किसी की खुशी में खलल न पड़े।

इस वर्ष होली और रमजान का समय एक साथ पड़ने से प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है। पुलिस प्रशासन ने अतिरिक्त बल तैनात किया है। सोशल मीडिया पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है, अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश हैं। संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त और हॉटस्पॉट क्षेत्रों में विशेष निगरानी की जा रही है। हर थाने और चौकी पर पीस कमेटी की बैठकों के जरिए सौहार्द का संदेश दिया गया है।

अधिकारियों ने अपील की है कि रंग खेलने में संयम बरता जाए और रोजेदारों की भावनाओं का सम्मान किया जाए। त्योहार का असली अर्थ एक-दूसरे की खुशियों का आदर करना है। पुलिस का प्रयास है कि न कोई तनाव हो, न कोई अफवाह, न कोई विवाद—सिर्फ भाईचारा और शांति।

एक जवान ने मुस्कुराते हुए कहा, “हम त्योहार नहीं मनाते, दूसरों को हर्षोल्लास से पर्व मनाने के लिये हम कृतसंकल्प हैं। हमारा त्योहार तब होता है, जब शहर में सब कुछ शांति से हो जाए।” उसकी आंखों में अपने परिवार से दूर रहने की हल्की टीस साफ झलक रही थी। कई पुलिसकर्मी ऐसे हैं जो वर्षों से अपने बच्चों के साथ होली की पिचकारी नहीं चला पाए, न ही परिवार के साथ ईद की नमाज अदा कर पाए।

जब घरों में रंग उड़ते हैं और लोग एक-दूसरे को गले लगाते हैं, तब खाकी वर्दी में जवान चौकन्ने खड़े रहते हैं। उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यही है कि कोई मां अपने बेटे के लिए चिंतित न हो, कोई बच्चा डरकर घर में न बैठे और कोई त्योहार कड़वाहट में न बदले।

खाकी सिर्फ एक वर्दी नहीं, बल्कि त्याग, धैर्य और कर्तव्य की मिसाल है। उनकी सख्त आवाज के पीछे एक ऐसा दिल है, जो चाहता है कि हर घर में खुशियां सुरक्षित रहें।

सम्मान है उन वर्दीधारियों का, जो अपनी छुट्टियां कुर्बान कर हमारी खुशियों की रखवाली करते हैं। जब शहर जश्न में डूबा होता है, तब भी खाकी चौकन्नी खड़ी रहती है—ताकि रमजान हो या होली, हर त्योहार शांति, सौहार्द और सुरक्षा के साथ मनाया जा सके।

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