March 30, 2026 5:18 pm

लखीमपुर खीरी की जमीन में तेल-गैस की  सर्च, कोलकाता से आई सैकड़ों की टीम, खेतों में 180 फीट तक पहुंची खुदाई

एपीएस न्यूज / रफी अहमद 

गोला गोकर्णनाथ खीरी।जिले के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों एक बड़े वैज्ञानिक सर्वे ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। पश्चिम बंगाल के कोलकाता से आई तकनीकी टीम खेतों के बीच भारी मशीनों और उपकरणों के साथ जमीन के भीतर छिपे संभावित क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस के भंडार की तलाश में जुटी है। सैकड़ों कर्मचारियों की यह टीम कई दिनों से इलाके में डेरा डाले हुए है और आधुनिक तकनीक के सहारे जमीन की गहराई में मौजूद हाइड्रोकार्बन संसाधनों की पड़ताल कर रही है।ग्रामीणों के लिए यह नजारा किसी बड़े औद्योगिक अभियान से कम नहीं है। खेतों के बीच खड़ी मशीनें, ट्रैक्टरों से जुड़े उपकरण, डीजल-पेट्रोल से चलने वाले पंपिंग सेट और जमीन में गहराई तक जाती ड्रिलिंग पाइपें लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही हैं। कई स्थानों पर जमीन की करीब 180 फीट तक खुदाई की जा चुकी है, ताकि जमीन की अलग-अलग परतों की जांच कर यह पता लगाया जा सके कि यहां तेल या गैस के भंडार मौजूद हैं या नहीं।

सैटेलाइट से तय होती है खुदाई की सटीक लोकेशन–सर्वे टीम में शामिल वरिष्ठ कर्मचारी वासुदेव ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकों से की जाती है। सबसे पहले सैटेलाइट के जरिए जमीन के भीतर की संरचना और संभावित हाइड्रोकार्बन क्षेत्रों का अध्ययन किया जाता है। इसके बाद संभावित स्थानों के कोऑर्डिनेट तय कर विस्तृत मैप तैयार किया जाता है।उन्होंने बताया कि मैप तैयार होने के बाद उसी के आधार पर जमीन पर सर्वे किया जाता है और फिर तय स्थानों पर खुदाई शुरू की जाती है। टीम को लगातार ऊपर से निर्देश मिलते रहते हैं कि किस स्थान पर कितनी गहराई तक खुदाई करनी है और किस प्रकार के उपकरणों का इस्तेमाल करना है।

दर्जनों ट्रैक्टर और मशीनें कर रही काम–सर्वे के दौरान बड़ी संख्या में मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें पंपिंग सेट, ड्रिलिंग उपकरण, डीजल और पेट्रोल से चलने वाली छोटी-बड़ी मशीनें, पाइपलाइन उपकरण और कई तकनीकी यंत्र शामिल हैं। दर्जनों ट्रैक्टरों के जरिए इन मशीनों को खेतों तक पहुंचाया जाता है और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग जगहों पर लगाया जाता है।कर्मचारियों के मुताबिक यह काम लगातार कई दिनों तक चलता है और हर दिन अलग-अलग स्थानों पर जमीन की जांच की जाती है।

सैकड़ों कर्मचारी कई दिनों से कर रहे काम–टीम के कर्मचारियों ने बताया कि कोलकाता से आई तकनीकी टीम में सैकड़ों लोग शामिल हैं। ये सभी लोग कई दिनों से इलाके में रहकर सर्वे कार्य में लगे हुए हैं। सर्वे के लिए अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है, जो निर्धारित क्षेत्रों में जाकर जमीन की जांच करती हैं।दिन के साथ-साथ कई जगह रात में भी मशीनें चलती दिखाई देती हैं, जिससे पूरे इलाके में लोगों की जिज्ञासा और चर्चा का माहौल बना हुआ है।

180 फीट तक पहुंची खुदाई–सर्वे टीम के एक अन्य कर्मचारी ने बताया कि कई स्थानों पर जमीन की करीब 180 फीट गहराई तक खुदाई की जा चुकी है। इस प्रक्रिया के दौरान जमीन की परतों से मिलने वाले नमूनों का अध्ययन किया जाता है और उनसे यह पता लगाया जाता है कि वहां हाइड्रोकार्बन की संभावनाएं कितनी हैं।उन्होंने बताया कि सर्वे का यह चरण बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी के आधार पर आगे की ड्रिलिंग और उत्पादन की संभावनाएं तय की जाती हैं।

खेत मालिकों से सहमति लेकर हो रहा काम–सर्वे टीम के अनुसार जिन खेतों में खुदाई की जा रही है, वहां काम शुरू करने से पहले जमीन मालिकों से बातचीत कर उनकी सहमति ली जाती है। यदि खुदाई या मशीनों के कारण फसल या जमीन को नुकसान होता है तो उसका मुआवजा भी दिया जाता है।जिस खेत में फिलहाल सर्वे चल रहा है, उसके मालिक मुकेश के भतीजे देवराज ने बताया कि कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें जानकारी दी है कि यदि जांच के बाद यहां तेल या गैस के भंडार मिलते हैं तो जमीन मालिकों को नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।उन्होंने बताया कि शुरुआत में ग्रामीणों को इस गतिविधि की ज्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन बाद में कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि यह जमीन के भीतर तेल और गैस की जांच का काम है।

44 जिलों में चल रही बड़ी हाइड्रोकार्बन जांच–सर्वे कार्य से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी संतोष कुमार ने बताया कि यह एक बड़े स्तर की परियोजना है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश के करीब 44 जिलों में ऑयल इंडिया की ओर से हाइड्रोकार्बन परियोजना के तहत जांच की जा रही है। इसके अलावा पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार के कुछ हिस्सों में भी इसी तरह का सर्वे किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि क्रूड ऑयल से डीजल, पेट्रोल, केरोसिन, ग्रीस समेत कई औद्योगिक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। जहाजों से लेकर बड़ी-बड़ी मशीनों और उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले कई उत्पाद इसी से बनते हैं। इसलिए जमीन के भीतर हाइड्रोकार्बन संसाधनों की खोज देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

अभी परीक्षण चरण में है परियोजना–अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल यह पूरा प्रोजेक्ट परीक्षण और सर्वे के चरण में है। सैटेलाइट मैपिंग, ग्राउंड सर्वे और खुदाई के दौरान मिलने वाले आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। यदि जांच में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं तो आगे यहां बड़े पैमाने पर ड्रिलिंग और उत्पादन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

गांवों में बढ़ी चर्चा और उत्सुकता–खेतों के बीच चल रही इस गतिविधि ने आसपास के गांवों में चर्चा का माहौल बना दिया है। लोग दूर-दूर से मशीनों को देखने पहुंच रहे हैं और यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर जमीन के भीतर क्या खोजा जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि इलाके में तेल या गैस के भंडार मिलते हैं तो इससे न केवल क्षेत्र की पहचान बदलेगी बल्कि विकास और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं। फिलहाल सबकी निगाहें इस सर्वे के नतीजों पर टिकी हुई हैं।

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