दीपोत्सव पर्व रोशनी और खुशियों का है त्यौहार, शोर व धुएं का नहीं अपनी सेहत, सुरक्षा का रखे विशेष ध्यान 

एपीएस न्यूज ब्यूरो रिपोर्ट–अनुराग पटेल 

गोला गोकर्णनाथ खीरी। पौराणिक गाथाओं से लेकर भारतीय संस्कृति में दीपों के त्योहार दीपावली को सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान श्रीराम वनवास पूरा करके अयोध्या लौटे थे, श्रीराम के आने की खुशी में अयोध्यावासियों ने खुशिया मनाई थी, इस दिन रोशनी से पूरा जग चमक उठा था लेकिन आज के दौर में दीपावली में लोग खुशियों का इजहार बम-पटाखे फोड़कर करते हैं। दीपावली खुशियों का पर्व है दीयों को जगमग करने का त्योहार है और सभी कड़वाहटों को मिटाकर अपनों के गले मिलने, एवं बड़ी से आशीष लेने का दिन है, इसे पटाखों के शोरगुल में गुम न होने दें। मिठाइयां बनाएं और बांटे, जरूरी नहीं है पटाखा जलाकर ही दीपावली मनाई जाए, देश में ही नहीं विदेश में भी रहने वाले हैं, कई भारतीय भी अलग तरीके से दीपावली मनाना पसंद करते कई लोग घर में मिठाई बनाते है अच्छे पकवान बनाते हैं और अपने नाते एवं रिश्तेदारों को घर पर मन बुलाकर जश्न मनाते हैं।

घर के आसपास की सफाई करे–साथ दीपावली से पहले अपने घर के आस-पड़ोस में गंदगी को भी साफ करें आसपास जब सफाई रहेगी तो खुशनुमा और खूबसूरत माहौल होगा उस दिन घर के बाग बगीचे में एक पौधा लगाए, जो आगे जाकर वायु प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा और आसपास के वातावरण को भी स्वच्छ रखेगा।

गीत और संगीत का आयोजन करें–भारतीय संस्कृति में वैसे भी खुशी मनाने का यह सबसे अच्छा तरीका माना जाता है इस दीपावली आप भी कुछ ऐसा ही करें, दोस्तों और रिश्तेदारों को बुलाएं उनके साथ अंताक्षरी खेलें और सभी के साथ बैठकर एक खुशनुमा माहौल बनाकर खिलखिलाते रहें। कहते हैं दीपावली और दशहरे पर बुराई अंत हुआ था इसलिए अपनी सारी बुरी आदतों को आप भी हमेशा के लिए नमस्कार कर दें। इस दीपावली अच्छी आदतों को अपनाए और अच्छे एवं संस्कारी लोगों से दोस्ती बढ़ाएं।

अगर दिल न माने,तो जरा संभलकर जलाएं पटाखे–इतना सब कुछ जानने के बाद कुछ खास कारक तरीका अपनाए, जिससे कम से कम प्रदूषण होगा और पटाखे जलाते समय ध्यान रखें कि परिवार के साथ साथ दूसरे लोग भी सुरक्षित रहें। और केवल ग्रीन पटाखों का ही इस्तेमाल करें ताकि दीपावली में आप भी सुरक्षित रहें परिवार भी सुरक्षित रहें और आसपास के लोग भी सुरक्षित रहे, क्योंकि दीपावली खुशियों का त्योहार है इसमें कहीं से भी कोई दुख आने की गुंजाइश न रहे।

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