एपीएस न्यूज–ब्यूरो रिपोर्ट
लखीमपुर खीरी। फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला होलिका दहन भारतीय संस्कृति का एक अत्यंत पवित्र पर्व है यह अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का दिव्य प्रतीक है इस दिन संध्या समय विधि-विधान से होलिका दहन किया जाता है और भक्तजन अपने जीवन से नकारात्मकता, पाप और अहंकार को दूर करने का संकल्प लेते हैं। फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन लोग रंग और गुलाल से एक-दूसरे के साथ होली खेलते हैं पंडित कमल किशोर मिश्र बताते हैं कि काशी के महावीर पंचांग के अनुसार इस वर्ष होलिका दहन 2 मार्च सोमवार को अर्धरात्रि में भद्रा पुच्छ के समय रात्रि 11 बजकर 53 मिनट से मध्य रात्रि 12 बजकर 50 मिनट के बीच होलिका दहन करना शुभ होगा।
चंद्र ग्रहण जानकारी – रंगों के बीच सूतक काल
पंडित कमल किशोर मिश्र बताते हैं कि 3 मार्च मंगलवार को साल 2026 का का पहला चंद्रग्रहण भी लगेगा ग्रहण का समय शाम 6 बजे से 6:48 बजे तक रहेगा ग्रहण काल का समय 48 मिनट रहेगा ग्रहण का सूतक प्रात 9 बजे से शुरू हो जाएगा सूतक के दौरान मंदिरों के पट बंद रहेंगे और केवल भजन-कीर्तन होंगे।
रंगोत्सव पर्व – होली रंग खेलने या रंगोत्सव मनाने के संदर्भ में भविष्य पुराण का कथन है कि चैत्र कृष्ण पक्ष प्रतिपदा को बसंत उत्सव मनाया जाना चाहिए अब चैत्र कृष्ण प्रतिपदा उदयातिथि 4 मार्च दिन बुधवार को है अतः शास्त्र सम्मत रंग खेले जाने का निर्णय दिनांक 4 मार्च बुधवार का दिन ही निर्धारित करते है।













