एपीएस न्यूज ब्यूरो रिपोर्ट अनुराग पटेल
लखीमपुर-खीरी। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर गुरुवार को सनातन धर्म सरस्वती विद्या मंदिर बालिका इंटर कॉलेज, मिश्राना में भक्तिभाव और उल्लास से सराबोर कार्यक्रम आयोजित किया गया। दीप प्रज्ज्वलन एवं भगवान श्रीकृष्ण के पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। विद्यालय परिसर भजनों, नृत्य और कान्हा की लीलाओं से जीवंत हो उठा।कार्यक्रम में छात्राओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन एवं उनके आदर्शों से प्रेरित सुंदर भजन, नृत्य और भाषण प्रस्तुत किए। राधा-कृष्ण की मनमोहक सजीव झांकी ने उपस्थित लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। वहीं छात्राओं के नृत्य और हर्षिता बरनवाल द्वारा प्रस्तुत भजन ‘ओ कान्हा अब तो मुरली की…’ ने वातावरण को पूरी तरह कृष्णमय कर दिया।कार्यक्रम में वरिष्ठ समाजसेवी एवं विद्यालय की विद्वत परिषद के सम्मानित सदस्य राजेश दीक्षित ने कहा कि योगिराज श्रीकृष्ण के जीवन का प्रधान तत्व लोक-कल्याण रहा। सम्पूर्ण समाज के हितों के प्रति उनका समर्पण और भावनात्मक लगाव उनके व्यक्तित्व की प्रमुख विशेषता थी। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन संघर्ष, संगठन और संकल्प का प्रतीक है।उन्होंने श्रीकृष्ण के संघर्षपूर्ण जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि जन्म से पूर्व ही उनके छह भाइयों की निर्मम हत्या कर दी गई, माता-पिता कारागार में थे और जन्म लेते ही उन्हें अपने माता-पिता से अलग होना पड़ा। पूतना, अघासुर, बकासुर और धेनुकासुर जैसे असुरों के संकटों के बीच पले-बढ़े श्रीकृष्ण ने अंततः कालिया नाग के फनों पर नृत्य कर अधर्म के विरुद्ध साहस का संदेश दिया। उनकी बंशी की मधुर धुन जहां लोगों के चित्त को हर लेती है, वहीं उनका संघर्षमय जीवन आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।कार्यक्रम का कुशल संचालन विजय कुमार शुक्ल ने किया।विद्यालय की प्रधानाचार्य शिप्रा बाजपेई ने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन हमें सदैव सत्य और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। महाभारत के युद्ध में अर्जुन को दिया गया श्रीकृष्ण का गीता उपदेश हमें कर्म की महत्ता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि हमें फल की चिंता किए बिना अपने कर्तव्य और कर्म पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।अंत में प्रधानाचार्य ने छात्राओं को आशीर्वाद देते हुए सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं।।













