एपीएस न्यूज ब्यूरो रिपोर्ट अनुराग पटेल
लखीमपुर खीरी। थाना फरधान क्षेत्र में इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। जन्म के बाद जिस नवजात बच्ची को मां की गोद और परिवार का सहारा मिलना चाहिए था, उसे कथित तौर पर उसके अपनों ने गन्ने के खेत के किनारे जिंदगी और मौत के बीच छोड़ दिया। हालांकि, समय रहते पुलिस की नजर पड़ने से मासूम की जान बच गई। जानकारी के अनुसार, बेहजम रोड पर कैमासुर स्थित नायरा पेट्रोल पंप के आगे पुलिस स्टॉप के सामने गन्ने के खेत की ओर से नवजात बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। राहगीरों ने पास जाकर देखा तो एक नवजात बच्ची बदहवास हालत में खेत के किनारे पड़ी थी। मासूम जिंदा थी और भूख-प्यास के कारण लगातार रो रही थी। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोगों का कलेजा कांप उठा। राहगीरों ने तत्काल इसकी सूचना लीलाकुआं चौकी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और नवजात को अपनी गोद में उठा लिया। चौकी पर लाने के बाद बच्ची भूख से बिलखने लगी। ऐसे में पुलिसकर्मियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए रूई के सहारे उसे दूध पिलाया। कुछ देर के लिए खाकी की गोद ही उस मासूम के लिए मां की गोद बन गई। पुलिस ने आसपास के इलाके में नवजात के परिजनों की तलाश की और लोगों से जानकारी जुटाने का प्रयास किया, लेकिन तत्काल कोई सुराग नहीं मिल सका। बच्ची की हालत को देखते हुए पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उसका उपचार और देखभाल शुरू कराई गई। घटना ने जहां एक ओर नवजात को इस तरह सुनसान स्थान पर छोड़ने वाले लोगों की संवेदनहीनता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं दूसरी ओर पुलिसकर्मियों की संवेदनशीलता ने इंसानियत की मिसाल पेश की है। जिस मासूम को उसके अपनों ने खेत के किनारे बेसहारा छोड़ दिया, उसे खाकी ने अपनी गोद में उठाकर सुरक्षित अस्पताल पहुंचाया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नवजात बच्ची को खेत के किनारे किसने और क्यों छोड़ा? क्या इसके पीछे कोई मजबूरी थी या फिर जानबूझकर मासूम को मौत के मुंह में धकेला गया? फिलहाल पुलिस नवजात के परिजनों की तलाश और पूरे मामले की जांच में जुटी है। जांच के बाद ही घटना की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।













