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तेंदुए का खूनी तांडव: 7 दिन में दो मासूमों की मौत पर भड़के रेहान खान बोले “मूकदर्शक बना वन विभाग, सरकार की नाकामी ले रही बच्चों की जान!”

एपीएस न्यूज संवाददाता– रफी अहमद 

लखीमपुर खीरी। जिले के तराई अंचल में आदमखोर होते वन्यजीवों के खूनी आतंक और वन विभाग की कथित सुस्ती ने जनता का गुस्सा भड़का दिया है। महज एक हफ्ते के भीतर तेंदुए के हमलों में दो मासूम बच्चों के शिकार होने की दहला देने वाली घटनाओं पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव रेहान खान का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सीधे तौर पर वन विभाग की नाकारा कार्यशैली और प्रदेश सरकार की विफलता को जिम्मेदार ठहराते हुए तीखा हमला बोला है। रेहान खान ने कहा कि खीरी की जनता जंगली जानवरों के साए में जीने को मजबूर है, लेकिन जिम्मेदार महकमा कुंभकर्णी नींद सो रहा है। पहली हृदयविदारक वारदात धौरहरा इलाके के बोझिया फार्म में हुई, जहां घर की चौखट पर खेल रही नन्हीं बच्ची को तेंदुआ उठा ले गया। अभी इस सदमे से लोग उबर भी नहीं पाए थे कि सिंगाही क्षेत्र के टापर पुरवा में दूसरी मासूम जिंदगी तेंदुए के जबड़े में समा गई। एक के बाद एक हुई इन वारदातों ने पूरे इलाके को थर्रा कर रख दिया है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। सपा नेता रेहान खान ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “जब भी कोई मासूम अपनी जान गंवाता है, वन विभाग की औपचारिकता महज एक-दो पिंजरे लगाने तक सिमट कर रह जाती है। पिछले साल भी कई लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, लेकिन न सरकार चेती और न ही वन विभाग ने कोई स्थायी समाधान निकाला। यह लापरवाही नहीं, सीधे तौर पर प्रशासनिक असंवेदनशीलता है। रेहान खान ने सरकार से दो-टूक मांग की कि दोनों पीड़ित परिवारों को तत्काल ₹20-20 लाख की आर्थिक मदद दी जाए। इसके साथ ही प्रभावित इलाकों में कॉम्बिंग तेज करने, आधुनिक कैमरों व ड्रोन से निगरानी बढ़ाने और गांवों की सीमाओं पर पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि इंसानों और वन्यजीवों के बीच बढ़ते इस जानलेवा संघर्ष को रोकने के लिए व्यापक नीति की दरकार है। वर्ष 2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक और स्थायी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी मां की गोद असमय न उजड़े।

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