एपीएस न्यूज संवाददाता–रफी अहमद
गोला गोकर्णनाथ खीरी।अक्सर बिजली गुल होते ही हम बिजली विभाग में गुस्से में फोन घुमाते हैं और बिजली कर्मियों को उल्टा सीधा कहकर कोसते हैं और कभी-कभी अपशब्द भी कह बैठते हैं। लेकिन क्या कभी सोचा है कि कड़कड़ाती ठंड, चलती हुई तेज लू, तपती हुई धूप,तेज बारिश और आंधी में जब हम घरों में दुबके होते हैं, तब खंभे पर चढ़ा वह इंसान किस हाल में होता है? दो दिन से लगातार हो रही बारिश के सर्द मौसम, तेज हवा के थपेड़े और बारिश की तेज बौछारों के बीच ठिठुरते हाथों से 11,000 वोल्ट की हाईटेंशन लाइन को अलीगंज रोड गुप्ता कालोनी में दुरुस्त करना कोई मामूली काम नहीं था, एक छोटी सी चूक और जिंदगी खत्म। ऐसे ही जोखिम भरे माहौल में खंभे पर चढ़े एक कर्मचारी से जब उसके साथी ने पूछा–”कल तो तुम्हें बहुत तेज बुखार था?” तो कांपते होठों से जवाब आया”दवाई खाकर निकला था, काम तो करना ही है।” नौकरी सरकारी या संविदा की हो सकती है, लेकिन वह भी हमारी तरह इंसान ही हैं। उनका जीवन भी उतना ही कीमती है जितना हमारा, और उनके अपने भी घर पर उनका इंतजार करते हैं। अपनी सुख-सुविधा और जल्दबाजी में इन ‘लाइनमैनों’ के अदम्य साहस और समर्पण को नकारने के बजाय, इनके काम का सम्मान करना सीखें, इनका हौसला बढ़ाए रखें।














